सूर्यपुत्र कर्ण - वीर योद्धा या घृणित कायर
सूर्यपुत्र कर्ण महान योद्धा या सबसे बङा कायर
भारत के किसी महाग्रथ को अगर सबसे ज्यादा पढा गया है तो वो है कृष्ण द्वैतायन रचित महा भारत। इसका अनुवाद विश्व की लगभग सभी भाषाओ मे हुआ था, उर्दु फारसी, लैटिन, विश्व की हर प्रमुख भाषा मे हमे महा भारत मिल जायेगी, महा भारत कथा इतना प्रभावशाली है, इसका हर किरदार खुद मे इतनी गहराई लिये हुए है कि महा भारत जैसा दूसरा ग्रन्थ आज तक नही लिखा जा सका है।
महाभारत का नायक या बेवजह चर्चित ?
महाभारत का सबसे ज्यादा चर्चित किरदार अगर कोई है, तो वो अगराज कर्ण का किरदार है, भगवान कृष्ण को किरदार कहना हमारी मुर्खता होगी वो महा भारत की आत्मा है। अंगराज का किरदार महा भारत का सबसे चर्चित तथा विवादित किरदार है। विवादित इसलिये क्योकि अगर हम वेद व्यास रचित महाभारत का काव्य का अध्ययन करते है, तो हमे यह महसुस होता है कि कर्ण एक साधारण मनुष्य की भाति ईष्या द्वेष रखने वाला व्यक्ति था, उमर मे सबसे बङे पाण्डव युधिष्ठिर से 10 साल बङा कर्ण सदैव ईष्या की अग्नि मे जलता रहता था।
वास्तविकता और महिमा मण्डन की वजह
कर्ण के किरदार दूसरा पहलू, यानी उदारता, महानता, उस पर हुआ अत्याचार, ये सब बाते 1952 के रामधारी सिह दिनकर की कविता रश्मिरथी से प्रारंभ होते है, पर क्या कभी ने ये जानने का प्रयास किया कि रश्मिरथी को लिखने के पीछे दिनकर की मंशा क्या थी, रश्मिरथी को लिखने का उद्देश्य क्या था।
दिनकर भारत के सामाजिक मुद्दो पर मुखर होकर लिखनै वाले कवि है, उनकी जीवनी मे ये स्पष्ट है कि रश्मिरथी के माध्यम से उन्होने अम्बेडकर का समर्थन करते हुए भारत की जाति व्यवस्था पर निशाना साधा था, अर्थात रश्मिरथी मे जो कुछ भी लिखा है, वो दिनकर की कल्पना है, वास्तविकता नही।
शायद दिनकर को भी इस बात का अन्दाजा नही रहा होगा कि उनकी रचना सवर्ण समाज के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल की जायेगी, जाति आधारित राजनीती करने वालो का हथियार बन जायेगी, अगर होता, तो वो कभी रश्मिरथी की प्रकाशित नही होने देते।
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