iran esrael war

 हाल ही में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच बढ़े युद्ध जैसे हालात ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव फैल गया। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं।

ईरान की प्रतिक्रिया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रुकने से दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई प्रभावित हो गई, जिससे कई देशों में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई।
ऐसे हालात में भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं। लेकिन सरकार का कहना है कि भारत वैकल्पिक रास्तों और अन्य स्रोतों से तेल आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि देश में बड़ा संकट न आए।
दुनिया में युद्ध और तेल संकट की चर्चा के बीच भारत के भीतर भी यह बहस चल रही है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा कैसे मजबूत की जाए। ऐसे समय में कई लोग सरकार की रणनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों पर भरोसा जताते हुए कहते दिख रहे हैं कि कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में भी देश को संभालना ही असली नेतृत्व की पहचान होती है।

कोई टिप्पणी नहीं

समय बैंक

  समय बैंक स्विट्जरलैंड में पढ़ने वाली एक छात्रा ने बताया - स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान, मैंने अपने स्कूल के पास एक मकान किराए पर लिया थ...

Blogger द्वारा संचालित.