सेठ सेठानी और बाराती
कोई सेठ सेठानी एक रेल में चढे वे जिस डिब्बे में बैठे वह पुरी तरह से खाली था, इतने में ही वहां एक बारात आ गई और आपस में कहने लगे कि भाई वो डिब्बा खाली है चलो उसी में सारे बैठ जाते हैं।
वे सभी उसी सेठ सेठानी वाले डिब्बे में जा बैठे, अब बारात का एक रूल होता है बाराती घर से निकलते ही बाराती बन जाते हैं जबतक कोई उपद्रव न कर लें कोई टूट फूट न जाए तबतक उन्हें चैन नहीं पड़ता।
उनमें से एक बोला कि भाई ये जंजीर लटक रही है ये क्या है? रेल में कौनसी भैंस बांधनी है? बीच में बोलते हुए सेठ ने कहा कि भाई इसे चैन कहते हैं और इसे खींचने से रेल रूक जाती है, एक बाराती बोला कि चलो खींचकर देखते हैं रेल रूकती है या नहीं।
दुसरे बाराती ने कहा कि उधर पढ़कर देख बेवजह चेन खींचने पर 250 रूपए जुर्माना है। पहला बोला कि हां भाई जुर्माना बहुत ज्यादा है हम नहीं खींचते। तीसरा बाराती बोला कि भाई खींचे बगैर पता कैसे चलेगा कि रेल रूक जाती है? अतः हम पचास बाराती हैं सभी 5 -5 रूपए इकठ्ठा कर लो और 250 हो जाएंगे फिर चेन खींचते हैं।
सभी ने 5–5 रूपए इकठ्ठा किए और एक बुजुर्ग की झोली में डाल दिए और कहा कि टीटी जुर्माना लेने आए तो ये पैसे दे देना। फिर उनमें से एक ने चैन खींच दी और रेल रूकते ही टीटी दौड़ा हुआ आया और बोला हां भाई किसने चेन खींची, कोई नहीं बोला उन सबके बीच एक और आदमी बैठा था वो थोड़ा और ज्यादा शरारती तत्व था उसने सेठ की तरफ उंगली करते हुए टीटी से कहा कि चेन इसने खींची है।
अब सेठ के तन बदन में लगी आग कि यार कुछ किया नहीं फिर भी मेरा नाम ले रहे हैं, लेकिन उसने बुद्धि से काम लिया टीटी ने सेठ से पूछा कि हां भाई तुमने खींची थी चेन?
सेठ बोला कि हां जी मैंने ही खींचीं है। टीटी ने पूछा क्यों खींची?
सेठ ने कहा कि इन सभी ने मिलकर मेरे 250 रूपये छीन लिए इसलिए खींची, बाराती कहने लगे कि सेठ झूठ बोल रहा है हमने कोई पैसे नहीं छीने। सेठ ने तुरंत ही उत्तर दिया कि टीटी साहब पैसे छीनकर उस बुढ़े की झोली में डाल रखे हैं आप चाहें तो गिन लें पूरे 250 है।
टीटी ने बारातियों पर खूब डांट मारी और 250 रूपए सेठ को दिला दिए, जब टीटी चलने लगा तो सेठ बोला कि सर मेरा डिब्बा भी चेंज करवा दो नहीं तो आपके जाते ही ये लोग फिर छीन लेंगे।
बाराती बेशक उधम में तेज थे लेकिन सेठ दिमाग में सबसे तेज निकला।
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