कहानी: “कीमत”

 कहानी: “कीमत”

शादी को अभी तीन ही दिन हुए थे।

सुबह-सुबह रिया ने देखा कि रोहन अपने नए स्मार्टफोन पर फ़ोटो क्लिक कर रहा था—वही फ़ोन जो दहेज में मिला था।

रिया ने मुस्कुरा कर कहा,



“फोन कैसा है?”

रोहन ने शान से कहा,

“ज़बरदस्त! वैसे अपने पैसों से तो मैं 20–22 हजार का फोन ले भी नहीं सकता था। तुम्हारे पापा से बोल दिया था—‘थोड़ा अच्छा दिलवा देना।’ आखिर घर-परिवार में इज़्ज़त भी तो रहनी चाहिए।”

रिया बस चुप रह गई।

शाम को दोनों मार्केट गए।

तनिक आगे बढ़े ही थे कि एक बुजुर्ग महिला दुकान के बाहर बैठी दिखी—कपड़े बेच रही थी। धूप में पसीना टपक रहा था, हाथ काँप रहे थे, उम्र लगभग सत्तर के आसपास।

रोहन ने देखा और बोला,

“अरे इन जैसे लोगों की वजह से शहर का सारा सौंदर्य खराब होता है। पता नहीं क्यों सड़क किनारे बैठ जाती हैं!”

राह चलते वह लगभग पैर रख ही देता कि रिया ने उसका हाथ रोक लिया।

“रोहन, रुकिए…”

रिया तुरंत उस बूढ़ी महिला के पास गई।

“माँजी, आपको इतनी धूप में परेशानी होती होगी, न? चलिए, मैं आपको छाया में बैठा देती हूँ।”

यह कहते हुए उसने उनके हाथ में 200 रुपए रख दिए—

“ये आपकी मेहनत का है। मेरी शादी हुई है, मिठाई समझ लीजिए।”

वह बूढ़ी महिला आशीर्वाद देती रही,

“बेटा, भगवान तुम्हें सुख दे। तुम्हारी जिंदगी खुशियों से भर दे…”

रिया वापस आई तो रोहन ने हँसते हुए कहा—

“तुम जैसे लोग इनकी हिम्मत बढ़ा देते हो। 200 दे दिया? भीख दे दी? मेहनत करने दो इनको, भीख मत दो।”

रिया ने शांत स्वर में लेकिन पैनी नज़र से कहा—

“भीख?

भीख तो तब होती है रोहन…

जब कोई अपनी मेहनत का हक़ छोड़कर

दूसरों से बिना मेहनत कुछ मांग ले।”

रोहन सकपका गया।

रिया आगे बोली—

“यह महिला तो उम्र और मजबूरी में न जाने कितने साल से मेहनत कर रही है…

पर तुम?

तुमने पापा से फोन क्यों माँगा?

मेरे और मेरे परिवार की इज़्ज़त की कीमत लगा दी एक मोबाइल में?”

रोहन चुप।

रिया ने कहा—

“जो लोग खुद कमा सकते हैं…

फिर भी लड़की वालों से चीजें मांगते हैं,

बताओ—वो मेहनत कर रहे हैं या भीख मांग रहे?”

“दहेज अगर संस्कार है…

तो फिर गरीब माँ-बाप की 20–30 साल की अरमानों को निचोड़कर

क्यों किसी दूल्हे की जेब भरनी चाहिए?”

रोहन की निगाहें नीचे झुक गईं।

रिया बोली—

“सच्चा भिखारी वो बूढ़ी माँ नहीं थी,

जो उम्र से लड़कर काम कर रही थी।

सच्चा भिखारी वो है

जो अपनी हैसियत से ऊपर दिखने के लिए

दहेज मांगता है—

मान-सम्मान, सामान और नक़दी की भीख मांगता है।”

रीया की आँखें भर आईं—

“रोहन, ये विचार बदलोगे…

तब शादी चलेगी।

वरना ये मोबाइल भी तुम्हें जवाब देगा

कि कीमत किसने चुकाई है।”

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अब आप बताइए…

किसे कहेंगे असली भिखारी—

वो बुजुर्ग महिला जो मेहनत बेच रही थी,

या वो दूल्हा जो दहेज में मोबाइल और पैसे मांगता है?

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