तीसरे विश्वयुद्ध की आहट
ईरान-इज़राइल युद्ध 2026: एक विस्तृत विश्लेषण
युद्ध की शुरुआत कैसे हुई?
28 फरवरी 2026 को इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई और कई अन्य ईरानी अधिकारी मारे गए। इस हमले ने मध्य पूर्व के खाड़ी देशो की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।
यह संघर्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्य पूर्व में उसके सैन्य प्रभाव को लेकर वर्षों से बढ़ते तनाव का परिणाम था। इस्राएल अमेरिका के लगातार परमाणु समझौते (JCPOA) को फिर से स्थापित करने की 2025-2026 की कोशिशें विफल रहीं।
बात इतनी कैसे बिगड़ गयी
जून 2025 में इज़राइल और ईरान के बीच "बारह दिन का युद्ध" हुआ था, जिसमें इज़राइल ने ईरान की वायु रक्षा और परमाणु ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया था। उस युद्ध के बाद अमेरिका ने भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था।
दिसंबर 2025 के अंत में ईरान में भारी आर्थिक संकट के कारण विशाल राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन भड़क उठे — ये 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद सबसे बड़े प्रदर्शन थे। ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर कठोर कार्रवाई की।
युद्ध के मुख्य घटनाक्रम
1 मार्च 2026 तक इज़राइल और अमेरिका ने मिलकर लगभग 2,000 से अधिक हमले किए। इन हमलों के तीन मुख्य लक्ष्य थे: ईरान की वायु रक्षा को कमज़ोर करना, उसकी जवाबी हमले की क्षमता को नष्ट करना, और ईरानी कमांड व कंट्रोल सिस्टम को बाधित करना।
अमेरिका ने 7 मार्च तक ईरान में 3,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए।
ईरान का जवाब
ईरान ने इज़राइल पर और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दिया — जिनमें अज़रबैजान, बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और UAE शामिल हैं।
ईरान के IRGC ने कहा कि उसने मध्य पूर्व में कम से कम 27 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
जान माल का नुकसान
अब तक के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार ईरान में लगभग 1,255 लोग, इज़राइल में कम से कम 13 लोग, 8 अमेरिकी सैनिक और खाड़ी देशों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
लेबनान में इज़राइली हमलों के कारण 95,000 से अधिक लोग विस्थापित हो गए हैं और 123 लोग मारे गए हैं।
अमेरिका और ट्रंप की भूमिका
ट्रंप ने ईरान के नेताओं से "बिना शर्त समर्पण" की मांग की और कहा कि उन्हें "माफ़ी" दी जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की नौसेना, वायु रक्षा और मिसाइल क्षमता काफी हद तक नष्ट हो चुकी है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान पर हमले तब तक जारी रहेंगे जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते।
नया सर्वोच्च नेता
ईरान के सैन्य और राजनीतिक नेताओं ने मोजतबा ख़ामेनेई के प्रति निष्ठा की शपथ ली है, जिन्हें उनके मारे गए पिता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई के स्थान पर नए सर्वोच्च नेता के रूप में नामित किया गया है।
युद्ध का उद्देश्य: शासन परिवर्तन
इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरानी जनता को फ़ारसी में संबोधित करते हुए उनसे "शासन को उखाड़ फेंकने" के लिए सड़कों पर आने का आह्वान किया।
भारत पर क्या असर?
यह युद्ध भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है:
- तेल की कीमतें — ईरान एक प्रमुख तेल उत्पादक है, युद्ध से कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं।
- भारतीय प्रवासी — खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं जो अब खतरे में हैं।
- व्यापार मार्ग — मध्य पूर्व से गुज़रने वाले समुद्री व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं।
- चाबहार बंदरगाह — भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह में भारी निवेश किया है।
यह संघर्ष अभी भी जारी है और स्थिति तेज़ी से बदल रही है। यह 21वीं सदी का अब तक का सबसे बड़ा मध्य-पूर्वी युद्ध बनता जा रहा है।




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