कंपटीशन

 😛😛 कंपटीशन 😛😛

हमारे पड़ोस में एक नये किराएदार आए । किराएदार से मुझे कोई मतलब नहीं था मगर उसकी बीवी बहुत खूबसूरत थी । बिल्कुल सुबह की गुनगुनी धूप जैसी ।

सुबह सुबह जब वह बॉलकनी में आती तो ऐसा लगता था जैसे चांद निकल आया हो । एक तरफ सूरज और दूसरी तरफ चांद । शायद जन्नत का नजारा ऐसा ही होता होगा।

हमारी हर सुबह खूबसूरत होने लगी ।

एक दिन वो हमारे घर आई और बोली

"भाईसाहब, ये ट्यूर पर गये हैं। आप क्या मेरे लिए सब्जी ला देंगे?"

हम उछल पड़े।

"आप तो हुकुम करो बस, हम सब कुछ ला देंगे! सब्जी के अलावा और क्या लाना है?"

वह शरमा कर बोली "नहीं, और कुछ नहीं चाहिए। आप तो भिंडी ला दो बस! पाव भर!"

हम झट से पड़ोसन के लिए पाव भिंडी ले आए। पड़ोसी धर्म जो निभाना था।

"कितने की आई, भाईसाहब?"

हम भी उन्हें इम्प्रेस करने के लिए बोले "मात्र 20₹ की" ।

"पर अभी दो दिन पहले तो मैं 40₹ की पाव लाई थी"

हम कैसे कहते कि लाए तो हम भी 40₹ की हैं ? लेकिन दांतें दिखाते हुए कहने लगे

"हमारा सब्जी वाला हमसे ज्यादा पैसे नहीं लेता है । इसलिए"

"ठीक है भाईसाहब! कल से सब्जी आप ही लेकर आना" ।

हम भी खुश और भाभी भी खुश।

एक महीना हो गया । हमारी जेब ढीली होती गई मगर बात "सब्जी " से आगे बढ़ ही नहीं रही थी।

एक दिन हमने भाभीजी से पूछा "आजकल आप भिंडी नहीं खा रही हैं?"

"किसने कहा ? मैं तो रोज ही भिंडी का रही हूं।"

"लेकिन मुझे तो भिंडी लाए लगभग एक महीना हो गया है।"

भाभी मुस्कुराई और बोली "वो हमारे बांयी ओर शर्मा जी रहते हैं ना ! वे ला देते हैं भिन्डी। कह रहे थे कि 10₹ की पाव मिल जाती है बाजार में। इसीलिए मैं उन्हीं से मंगा लेती हूं आजकल!"

सच में, आजकल कितना कंपटीशन हो गया है हर जगह ! पड़ोसन पटाने में भी कंपटीशन ! आदमी बेचारा करे तो क्या करे ?

🤪🤪🤪

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