मेरी बेटी - उसकी बेटी

मैं ने अपनी बेटी को जब सड़क दुर्घटना में खोया , उसकी बेटी तब तीन - साढ़े तीन साल की थी । मेरी पत्नी तभी ऐसी हताश हुई कि बिस्तर पकड़ लिया और अपनी आवाज़ खो बैठी । डॉक्टर का कहना था कि सदमे से ऐसा हो गया है , पर वह हमें सुन सकतीं हैं ।

पहले मैं अपनी नातिन के जन्मदिन पर हर साल बेटी की ससुराल ज़ाया करता था । पर बेटी के गुजर जाने के कुछ समय बाद ही कोरोना की जकड़न में ज़िंदगी ऐसी उलझी कि चाह कर भी दो साल तक नातिन से मिल ना सका ।

इसी बीच नातिन अपने पिता और दादी- बाबा के साथ रहती रही और फिर एक दिन उसके पिता का पुनर्विवाह हो गया ।मैं सशंकित था कि अब जाने क्या होगा मेरी नातिन का , पर असहाय था , किसके सहारे उसे अपने पास रखता ?

फ़ोन पर बात करता तो था , पर पत्नी की ज़िम्मेदारी और कोरोना ने नातिन से मिलने का मौक़ा ना दिया ।

इस बार उसका जन्मदिन आया तो बड़े संकोच से मैंने अपने समधी से घर आने की इजाज़त माँगी , दरअसल मैं उसकी नई माँ का व्यवहार भी देखना चाहता था और अपनी नातिन को गले लगाना चाहता था जो अब छ: साल की हो गई थी ।

मैं अपनी नातिन को देखकर सुखद आश्चर्य से भर गया जब वह अपनी ‘मम्मी’ के पीछे छुपी मुझे संशय से देखती रही । मेरे लाए खिलौने और फ्रॉक भी उसे मेरे पास नहीं ला सके ।मैं उसे अपने गले लगाना चाहता था ,अपनी बेटी को याद करके रोना चाहता था , तो उस बच्ची को मैंने थोड़ा समय देना मुनासिब समझा । दोपहर के खाने के बाद वह मेरे पास बैठने को तैयार हो गई पर पूरे समय अपनी मम्मी का आँचल पकड़े रही ।

मैंने कुछ मज़ेदार तस्वीरें अपने मोबाइल की गैलरी से निकाल कर उसे दिखाई ताकि उससे कुछ बात कर सकूँ ,दरअसल इस बहाने मैं अपनी बेटी उसे दिखाना चाहता था ।

मैं ने उसे अपनी बेटी की तस्वीर दिखाई भी पर जब उसने पूछा कि ये कौन है ? तो मैं बुरी तरह चौंक गया , हैरान हो गया । बस यह कह पाया कि ये मेरी बेटी है ।

शाम को जन्मदिन की पार्टी में उसकी मम्मी ने उसे परी की तरह तैयार किया था । सब कुछ मेरी कल्पना और उम्मीद से बिल्कुल अलग था पर बहुत सुंदर था ।

एक माँ - बेटी के बीच जैसा बँधन होना चाहिए , वैसा ही था , पर घर लौटकर अपनी पत्नी को अपनी नातिन का सब ब्यौरा सुनाते हुए जब यह भी कहा कि मेरी नातिन मेरी बेटी को भूल गई है, तब ना जाने क्यों मैं फूट- फूटकर रो पड़ा

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