दस रुपये के बदले 13 लाख रुपये

 *🌳🦚आज की कहानी🦚🌳*

*💐💐दस रुपये के बदले 13 लाख रुपये💐💐*

सेठ ने अभी दुकान खोली ही थी कि एक औरत आई और बोली "सेठ जी ये अपने दस रुपये रख लो"

सेठ उस गरीब सी औरत को प्रश्नवाचक नजरों से देखने लगा, जैसे पूछ रहा हो कि मैंने कब तुम्हें दस रुपये दिये थे ?

औरत बोली, "कल शाम को मैं सामान लेकर गई थी तब आपको सौ रुपये दिये थे। 70 रुपये का सामान खरीदा था। आपने 30 रुपये की जगह मुझे 40 रुपये वापस दिये थे ।"

सेठ ने दस रुपये के नोट को माथे से लगाया, फिर गल्ले में डालते हुए बोला एक बात बयाइये बहन जी, आप सामान खरीदते समय कितने मौल भाव कर रही थी। पांच रुपये कम करवाने के लिए आपने कितनी बहस की थी और अब आप ये दस रुपये लौटाने चली आई हो ?

औरत बोली "पैसे कम करवाना मेरा हक है।" मगर एक बार मौल भाव होने के बाद, "उस चीज के कम पैसा देना पाप है।"

सेठ बोला, आपने कम पैसे कहाँ दिये? आपने तो पूरे पैसे दिये थे, ये दस रुपए तो मेरी गलती से आपके पास चले गए थे, रख लेती, तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।

औरत बोली आपको कोई फर्क नहीं पड़ता ? मगर मेरे मन पर हमेशा ये बोझ रहता कि मैंने जानते हुए भी आपके पैसे खा लिए इसलिए मैं रात को ही आपके पैसे वापस देने आई थी मगर उस समय आपकी दुकान बन्द थी।

सेठ ने महिला को आश्चर्य से देखते हुए पूछा "आप कहाँ रहती हो ?"

वह बोली "सेक्टर बीस में रहती हूँ।"

सेठ का मुँह खुला का खुला रह गया, बोला "आप 10 किलोमीटर दूर से" ये दस रुपये देने,"दूसरी बार आई हो?"

औरत सहज भाव से बोली "हाँ दूसरी बार आई हूँ" मन का सुकून चाहिए तो "ऐसा करना पड़ता है।" मेरे पति इस दुनिया मे नहीं हैं, मगर उन्होंने मुझे एक ही बात सिखाई थी कि "कभी दूसरे के हक का एक पैसा भी, मत खाना क्योंकि इंसान चुप रह सकता है ... मगर - "ऊपर वाला कभी भी, हिसाब मांग सकता है और... "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है" इतना कह कर वह औरत चली गई।

सेठ ने तुरन्त गल्ले से तीन सौ रुपये निकाले और स्कूटी पर बैठता हुआ अपने नौकर से बोला तुम दुकान का ख्याल रखना, मैं अभी आता हूँ।

सेठ बाजार में ही एक दुकान पर पहुंचा। फिर उस दुकान वाले को तीन सौ रुपये देते हुए बोला, प्रकाश जी, ये अपने तीन सौ रुपये रख लीजिए, कल जब आप सामान लेने आये थे, तब हिसाब में ज्यादा जुड़ गए थे।

प्रकाश हँसते हुए बोला "पैसे हिसाब में ज्यादा जुड़ गए थे, तो आप मुझे रुपए तब दे देते जब मैं दुबारा दुकान पर आता"... इतनी सुबह सुबह आप तीन सौ रुपये देने चले आये।

सेठ बोला, जब आप दुबारा आते ? "तब तक मैं मर जाता तब"..?? आपके मुझमें तीन सौ रुपये निकलते हैं , ये आपको तो पता ही नहीं था, न..? इसलिए देना जरूरी था। पता नहीं ...? "ऊपर वाला कब हिसाब मांगने लग जाए"...? और... "उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी, मिल सकती है"...

इतना कह कर सेठ तो चला गया..?

मगर प्रकाश के दिल में खलबली मच गई क्योंकि दस साल पहले उसने अपने एक दोस्त से "तेरह लाख रुपये" उधार लिए थे। मगर पैसे देने के दूसरे ही दिन,"दोस्त मर गया था।"

दोस्त के घर वालों को पैसों के बारे में पता नहीं था। इसलिए किसी ने उससे पैसे वापस मांगे नहीं थे। प्रकाश के दिल में लालच आ गया था इसलिए खुद पहल करके वह पैसे देने नहीं गया। आज उसी दोस्त का परिवार गरीबी में जी रहा था। दोस्त की पत्नी लोगों के घरों मे झाडू पौंछा करके बच्चों को पाल रही थी। फिर भी, प्रकाश उनके पैसे हजम किये बैठा था।

सेठ का ये वाक्य " पता नहीं ...? "कब ऊपर वाला हिसाब मांगने बैठ जाए"...? और ...."उस हिसाब की सजा मेरे बच्चों को भी मिल सकती है"....

"प्रकाश को भी अब डर लग रहा था"...

प्रकाश दो तीन दिन तक टेंशन में रहा आखिर में उसका जमीर जाग गया। उसने बैंक से तेरह लाख रुपये निकाले और पैसे लेकर दोस्त के घर पहुँच गया। दोस्त की पत्नी घर पर ही थी।

वह अपने बच्चों के पास बैठी उन्हें कुछ अच्छी बातें सिखा रही थी कि प्रकाश जाकर उसके पैरों में गिर गया और कहा आप एक एक रुपये के लिए संघर्ष कर रही हो, मेरे को क्षमा करना आपके पैसे समय पर नहीं दे सका, उस विधवा औरत के लिए 13 लाख रुपये बहुत बड़ी रकम थी, पैसे देखकर उसकी आँखों में आँसू आ गए। वह प्रकाश को दुआएं देने लगी, जो उसने ईमानदारी दिखाते हुए, उनके पैसे लौटा दिये।

"ये वही औरत थी....," जो" "सेठ को दस रुपये लौटाने, दो बार गई थी"...।

अपनी "मेहनत" और "ईमानदारी" का खाने वालों की ईश्वर "परीक्षा" जरूर लेता है मगर कभी भी, उन्हें अकेला नहीं छोड़ता। एक दिन सुनता जरूर है "ऊपर वाले पर भरोसा रखिये"...

कोई टिप्पणी नहीं

दस रुपये के बदले 13 लाख रुपये

  *🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐दस रुपये के बदले 13 लाख रुपये💐💐* सेठ ने अभी दुकान खोली ही थी कि एक औरत आई और बोली "सेठ जी ये अपने दस रुप...

Blogger द्वारा संचालित.